आशीष रंगारे के शाला में 20 साल

रायगढ़, छतीसगढ़|

प्रिय Humans of Indian Schools,

20 साल की शासकीय सेवा में मैंने बहुत कुछ सीखा है, और उन्ही कुछ बातों को मैं आपके साथ बाँटने आया हूँ। जब मैं शासकीय प्राथमिक शाला, हरदीझरिया , रायगढ़ में एक अध्यापक की पोस्टिंग पर लगा तो यहाँ बच्चों की कक्षा के लिए एक भवन भी नहीं था। पीने के पानी से लेकर शौचालय तक, कोई बुनियादी सुविधा नहीं थी। जब मैं उस विद्यालय के छोटे छोटे बच्चों को इन बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसता देखता था, तो मुझे बहुत पीड़ा होती थी| मन ही मन मैंने ठान लिया था कि इन बच्चों के लिए मैं पढ़ाई को एक सुखद अनुभव बनाऊँगा|

आज मेरी वह कल्पना सफल होती दिख रही है। चाहे अपने वेतन से ही सही, पर मैं अपनी शाला में अच्छी सुविधाएँ लाया। शाला प्रांगण की पक्की ढलाई करवाई, ताकि बरसात का पानी जमा होने से बच्चों की पढ़ाई में बाधा उत्पन्न न हो। पानी का कनेक्शन लगवाने के बाद मैंने एक डाइनिंग मेज बनवाया, जिसपर बच्चे बैठ कर मध्यानय भोजन कर सकें। शाला के कमरों की पुताई करवाने के बाद मैंने वहाँ मेज लगवाये|

इस सबके बाद भी कई बच्चे पैसों के अभाव के कारण अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पा रहे थे। ऐसी दो बच्चियों के कॉलेज की शिक्षा न रुके, इसके लिए उनकी शिक्षा का खर्चा मैं उठा रहा हूँ।

इतने प्रयास के बाद जब इन बच्चों के चेहरों पर मुस्कराहट देखता हूँ तो लगता है के जीवन का संघर्ष सफल रहा है ,और यूँ ही जारी रहेगा। मुझे विश्वास है कि आप भी अपने विद्यालयों में इसी प्रकार बदलाव ला रहे हैं|

आपका प्रिय,

आशीष रंगारे

यह कहानी श्री आशीष रंगारे के जीवन पर आधारित है जो, रायगढ़, छत्तीसगढ़ से हैं|
कहानी लावन्या कपूर के द्वारा लिखी गयी है|  
हम छत्तीसगढ़ सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने हमें  Humans of Indian Schools से परिचित किया|

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Aruna diwan

very nice

Aaditya sharma

nice

Arjun varma

great sir

arpan

an emotional and innovative practice done by rang are sir

samiksha tripathi

स्कूल के प्रति कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक को सादर नमन

raghuvansh mishra

good

Tilak Ram Patel

very nice

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7 Comments