कम समय में कठोर परिश्रम

दुर्ग, छत्तीसगढ़|

मैं अविनाश अवस्थी सर का बहुत आभारी हूँ| हमारे विद्यालय में पाँच कक्षाएँ थी पर केवल दो शिक्षक| कम शिक्षक होने के कारण अविनाश सर की कोशिश यह रहती की किस तरह सभी बच्चों को एक साथ, साधन-संपन्न तरह से पढ़ाया जाए| कम शिक्षक होने के कारण बच्चों को नुक्सान न हो|तो हर रोज़ प्रार्थना सभा में वे सभी बच्चों को 1-20 तक पहाड़े दोहराने को कहते| सभी फलों, सब्जियों, रंगों,आदि के नाम बारी-बारी से हफ़्ते दर हफ़्ते कहलवाते| इस तरह हँसते- हँसते हम सभी बच्चे पहाड़े तथा वस्तुओं के नाम आसानी से याद कर लेते| परीक्षा के दिनों में हमें कम मेहनत करनी पढ़ती, और विद्यालय में शिक्षक की कमी कभी भी महसूस नहीं होती| हमारे विद्यालय में भले ही खेल-कूद के लिए पीoटीo कोच नहीं थे, फिर भी अविनाश सर हमें मेंढ़कदौड़, सुई-धागा दौड़ इत्यादि करवाते| और तो और मेरे सहपाठियों ने खंड और ज़ोनल स्तर पर पदक जीते हैं|

मै हमेशा अविनाश सर का आभारी रहूँगा जिन्होंने कम संसाधनों के होने के बावजूद हमारे विद्यालय को आगे बढ़ने के लिए अत्यंत म्हणत की और छात्रों को हर छेत्र में कामयाब होने का मौका दिया| अगर वह न होते तो शायद मेरा जीवन बहुत अलग होता|

यह कहानी श्री अविनाश अवस्थी के जीवन पर आधारित है जो, दुर्ग, छत्तीसगढ़ से हैं|
कहानी ईशा राखरा के द्वारा लिखी गयी है|  
हम छत्तीसगढ़ सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने हमें  Humans of Indian Schools से परिचित किया|

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Pramila Dewangan

very good prerna mili

Janak Raj

Nice Sir

Rakesh Kumar Sharma

good efforts for co eduction

Surinder kumar

good

Smt. Jagriti Markande

*अवस्थी सर जी, बहुत बहुत बधाई* 💐
*Keep it up*

usha sao

well done awinash sir ji. . . . feeling proud to have sach a good teacher with us. usha Sao

usha sao

well done awinash sir ji. ..feeling proud to have sach a teacher with us.

Shweta Dubey

nice sir

raghuvansh mishra

good

Mrs Pragya Singh

बहुत बहुत बधाई अवस्थी सर 🙏🙏🎉🎉💐💐आपका बच्चों को पढ़ाने का जुनून काबिलेतारीफ है 👍keep it up

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10 Comments