अंग्रेजी को मनोरंजक बनाएँ

बलोदा बाज़ार, छतीसगढ़|

चलचित्र देखना आखिर किसे पसंद नहीं? और अगर चलचित्र के पात्र हम खुद हो, तो बात ही कुछ और है। इसीलिए, दिनेश वर्मा जी ने अपनी कक्षा में थिएटर यानि नाटक-कला का इस्तेमाल करना शुरू किया।

छत्तीसगढ़ के एक छोटे से ज़िले से आने वाले इन बच्चों के लिए अंग्रेज़ी हमेशा से एक मुश्किल विषय रहा है। दिनेश वर्मा जी ने इस बात को समझते हुए एक तरकीब निकाली। उन्होंने अंग्रेजी की किताब में लिखी हुई कहानियों को आधार बनाया। पहले वह बच्चों को कहानी समझाते। फिर, उन कहानियों के मुख्य पात्र वह एक एक बच्चे को बना देते। बच्चों को अपने-अपने पात्र के संवाद को याद करना होता है। इसके बाद बच्चे उस कहानी पर एक नाटक तैयार करते, जिसको पूरा स्कूल मिलकर देखता। हर पाठ के लिए दिनेश जी इसी तरीके का इस्तेमाल करते, जिससे बच्चों के उल्लास की कोई सीमा नहीं रहती!

हर नए नाटक में बच्चों की एक नयी गुणवत्ता देख़ने को मिलती। और तो और, उनकी कक्षा के बच्चे इसी कारण अंग्रेज़ी में प्रवाहपूर्ण बोलना सीखे| ये हुआ ना मुश्किल विषय सीखने का मज़ेदार तरीका!

यह कहानी श्री दिनेश कुमार वर्मा के जीवन पर आधारित है जो, बलोदा बाज़ार, छत्तीसगढ़ से हैं|
कहानी लावन्या कपूर के द्वारा लिखी गयी है|  
हम छत्तीसगढ़ सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने हमें  Humans of Indian Schools से परिचित किया|

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Neeta Pandey

nice

rameshwarprasadbhagat

बहुत अच्छा

Hemant Kumar Verma

good

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54 Comments