डोमन डहरिया की मनोरंजक कविताएं

रायपुर, छत्तीसगढ़|

एक अच्छी कविता से अगर हम अपना दिन शुरू करें तो वो दिन अच्छा हो जाता है। तो ज़रा सोचिये कि अगर हम कविता के माध्यम से पढ़ें, तो पढ़ाई कितनी खूबसूरती से होगी !

रायपुर के डोमन डहरिया जी ने ये बात समझी, और इसका कार्यान्वयन भी किया। अपने प्राथमिक शाला के पहली, चौथी व पांचवी कक्षा के बच्चों को पढ़ाने के लिए वो खुद ही मनोरंजक कविताएँ बनाते हैं, और अपनी कक्षा में सुनाते हैं। हिंदी वर्ण माला से लेकर गणित तक, उनके पास सबके लिए कविताएँ हैं। चलिए हम भी सुनते हैं उनकी एक कविता :

अ अ में कुछ नहीं है , बड़े अ में लठिया
छोटी इ में कुछ नहीं है, बड़ी ई में चुटिया
छोटे उ में कुछ नहीं है, बड़े ऊ में पुंछिया !

ऐसी मनोरंजक कविताएँ हों तो पढ़ने का मज़ा दोगुना हो जाये। डोमन डहरिया जी अपने 16 साल के कार्यकाल में हमेशा से यही मानते आये हैं कि बच्चे रटेंगे तो भूल जायेंगे, पर बच्चे करेंगे तो याद रखेंगे। वो चाहते हैं कि उनका पढ़ाया हुआ कभी बच्चे भूलें न। और ये बात तो है कि मनोरंजन से सीखी चीज़ें हमें हमेशा याद रहती हैं।

यह कहानी श्री डोमन डहरिया के जीवन पर आधारित है जो, रायपुर, छत्तीसगढ़ से हैं|
कहानी लावन्या कपूर के द्वारा लिखी गयी है|  
हम छत्तीसगढ़ सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने हमें  Humans of Indian Schools से परिचित किया|

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sheela sahu

Good job

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