स्कूल को बच्चों की पसंदीदा जगह बनाना

महासमुंद, छत्तीसगढ़|

स्कूल को बच्चों की पसंदीदा जगह बनाया नसीम खान ने| छटी, सातवीं और आठवीं कक्षा के बच्चों की सीखने की क्षमता व जिज्ञासा अत्यधिक होती है। पर अगर स्कूली शिक्षा बच्चों के लिए प्रासंगिक न हो, तो बच्चे शिक्षा में रुचि नहीं लेते हैं। इसीलिए नसीम जी ने शिक्षा को बच्चों की पृष्टभूमि से जोड़ना शुरू किया। किसने सोचा था कि मुग़ल राजा के नाम श्लोक के द्वारा बच्चों को याद करवाना इतना आसान होगा!

बच्चों की रुचि बढ़ाने के लिए नसीम खान अपने स्कूल में सिलाई मशीन लेकर आये। त्यौहार के समय नसीम जी बच्चों को कहानी सुनाकर उस त्यौहार के बारे में बताते हैं। साथ ही साथ, वह बच्चों के साथ ग्रीटिंग कार्ड्स तथा रंगोली भी बनाते हैं। स्कूल को बच्चों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से जोड़ने का यह बहुत ही अच्छा तरीका है।

नसीम खान इस बात को समझते हैं कि बच्चों की शिक्षा के लिए उनका रोज़ स्कूल में उपस्थित होना कितना महत्त्वपूर्ण है। तो वह रोज़ स्कूल एक घंटा जल्दी आते हैं। जल्दी आकर वह उन बच्चों के माता-पिता से बात करते हैं जो पिछले दिन अनुपस्थित थे। उनसे बच्चों की अनुपस्थिति का कारण जानते हैं, और फिर बच्चों को अलग से बिठा कर छूटा हुआ पाठ पढ़ाते हैं । उन्होंने इस प्रकार किसी बच्चे को कक्षा के पाठ्यक्रम से पिछड़ने नहीं दिया। भारतीय शिक्षा प्रणाली के लिए नसीम खान प्रेरणादायक हैं।

यह कहानी श्री नसीम खान के जीवन पर आधारित है जो, महासमुंद, छत्तीसगढ़ से हैं|
कहानी लावण्या कपूर के द्वारा लिखी गयी है|  
हम छत्तीसगढ़ सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने हमें  Humans of Indian Schools से परिचित किया|

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Nisha devi

good

Santosh Kumar

बहुत अच्छा

श्री मोजय शंकर पटेल

अनुकरणीय कार्य

Aruna diwan

nice work

Aaditya sharma

nice

Arjun varma

sunder

Priyansh

hi

samiksha tripathi

बहुत ही अच्छा प्रयास है सर जी

Deepak singh thakur

doing good job naseemji

raghuvansh mishra

bahut hi anukarniy aur santushti Milne wala kam hai. yah sab kare.

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