कक्षा में भाषा का महत्त्व

महासमुंद, छत्तीसगढ़|

जिस साधन का प्रयोग हम अपनी रोज़मर्रा के जीवन में करते हैं, उसको शिक्षा में महत्व देना बहुत ज़रूरी है। निवेश दीक्षित जी ये मानते है कि बच्चों को विभिन्न भाषाओं से परिचित करना ज़रूरी है| मातृभाषा के साथ-साथ हिंदी, अंग्रेजी व अन्य भाषाओं का ज्ञान होना भी ज़रूरी है। अपनी प्राथमिक शाला के बच्चों की भाषा प्रवीणता पर काम करने के लिए उन्होंने कई तरीके अपनाये हैं।

पहली व दूसरी कक्षा के लिए वे कहानी-कविता से लेकर चित्रों का प्रयोग करते हैं, जिनसे बच्चे भाषा के मूल समझते हैं। इतने छोटे बच्चों के साथ वे किताबों का इस्तेमाल करना पसंद नहीं करते। तीसरी, चौथी व पाँचवी के बच्चों की भाषा के उच्चारण पर वो बहुत काम करते हैं। उन्हें ‘मैच थी फॉलोविंग (match the following) देते हैं, जिसमे एक तरफ अंग्रेजी का शब्द होता है और दूसरी तरफ उसका हिंदी में उच्चारण करने का तरीका। ये बच्चों के लिए बहुत लाभदायक साबित गतिविधि थी।

पर सिर्फ कक्षा में पढ़ाना काफी नहीं। जो कोई बच्चा स्कूल आना बंद कर दे, तो निर्वेश जी उसके घर जाकर उसके घरवालों से बात करते हैं, तथा कोई उपाय निकालने की कोशिश करते हैं।

इन ईमानदार कोशिशों का फल मिलते देख पूरी शिक्षा प्रणाली को निर्वेश दीक्षित जैसे शिक्षकों पर गर्व है।

यह कहानी श्री निर्वेश दीक्षित के जीवन पर आधारित है जो, महासमुंद , छत्तीसगढ़ से हैं|
कहानी लावन्या कपूर के द्वारा लिखी गयी है|  
हम छत्तीसगढ़ सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने हमें  Humans of Indian Schools से परिचित किया|

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Aruna diwan

very nice

Arjun varma

bahot badhiya

Ramsunderyadav

good

raghuvansh mishra

Good effort.

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4 Comments