प्रज्ञा सिंह का गणित का लैब

हनोडा, दुर्ग, छत्तीसगढ़|

“कठिन विषय है न, इसीलिए बच्चे डरते बहुत हैं|” गणित के बारे में बात करते हुए प्रज्ञा सिंह ने कहा।

“अब जो चीज़ें असल ज़िन्दगी में मौजूद ही नहीं हैं, उनके बारे में आप बच्चों को कैसे समझाओगे?” प्रज्ञा जी के इस सवाल ने मुझे अचम्भे में डाल दिया।

इस सवाल का जवाब खोजते-खोजते छठी से आठवी कक्षा को गणित पढ़ाने वाली प्रज्ञा सिंह ने एक जोखिम उठा कर अपने विद्यालय में एक गणित के लैब की शुरुआत की। ये बात थी 2016 की। प्रज्ञा जी ने अपने गणित के लैब में 100 से ज़्यादा टीoएलoएमo यानि टीचिंग लर्निंग मटिरिअल बनाये हैं। इन्हे बनाने में बच्चों ने उनकी बहुत मदद की। कभी बच्चे चार्ट चिपकाते तो कभी अलग-अलग आकार के कागज़ काट कर अपनी मैडम को देते। इसके अलावा लैब बनाने का खर्चा तथा नए-नए टीoएलoएमo का आविष्कार प्रज्ञा जी ने खुद किया|

सर्जरी के बाद, मेडिकल छुट्टी पर होने के बावजूद वे रोज़ विद्यालय आती और लैब को चालू रखने का प्रयास करती| “बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए| मुझे डर लगता था कि मेरे न होने पर बच्चों को गणित कौन पढ़ाएगा?”

मैथ्स लैब के साथ प्रज्ञा जी ने एक पुस्तकालय भी शुरू किया, जिसका नाम है मुस्कान पुस्तकालय। इस नवीन पुस्तकालय में बच्चों को अपने घर से एक-एक किताब लाकर पुस्तकालय में रखनी होती है। बच्चे किताबें खुद लेकर खुद ही पुस्तकालय में वापस कर जाते हैं। इससे वे एक दूसरे की किताबें भी पढ़ लेते हैं और किताबों के लिए उत्तरदायी भी हो जाते हैं।

उनके प्रयास का फल इन बच्चों में साफ़ दिखता है| जहाँ उनके विद्यालय में 10 प्रतिशत बच्चे भी दिखाई नहीं देते थे, मैथ्स लैब के काम के लिए अब 60-70% बच्चे रोज़ स्कूल आते हैं। एक छोटा सा विचार वाकई बड़े बदलाव ला सकता है।

यह कहानी प्रज्ञा सिंह के जीवन पर आधारित है जो, दुर्ग, छत्तीसगढ़ से हैं|
कहानी लावन्या कपूर के द्वारा लिखी गयी है|  
हम छत्तीसगढ़ सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने हमें  Humans of Indian Schools से परिचित किया|

Leave a Reply

Notify of
Neeta Pandey

good

श्रीमती प्रियंका गोस्वामी
प्रिय प्रज्ञा जी,,,,,आत्मीय नमन,,,,,,, 🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺 प्रज्ञा की प्रेरणा,,,,,【कविता 】 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 वो जो जगमगाते लक्ष्य,,,,,,, आपके अंतस में दमक रहे हैं,,,,,,,,,,,, सुनिए प्रज्ञा जी,,,,,,, आपकी ही प्रेरणा से,,,,,,,,,,,,, हम सभी चल रहे हैं,,,,,,,,,,✒️✒️✒️ झिलमिलाते हुए दो तारे,,,,,,,, जो आप तोड़ लाई हैं,,,,,,,,,,,,,,, विद्यार्थियों की उम्मीदों में,,,,,,,, जो आप टांक आई हैं,,,,,, सुनिए प्रज्ञा जी,,,,,,,,,,,,, हर सितारे आपसे रूबरू होकर,,,,,, झमक कर चल रहे हैं,,,,,, आप ही की प्रेरणा से,,,,,,, हम सभी चल रहे हैं,,,,,,✒️✒️✒️ गणित की गमक बड़ी दूर तक आ रही है,,,,,, ज्यों ज्यों शिक्षक की नज़र,,,,,,, आपकी कक्षा के क़रीब जा रही है,,,,,,,, संघर्ष ही सफलता दिलाती है,,,,,,,, आपके… Read more »
Mrs Pragya Singh

बहुत सुन्दर कविता लिखी है आपने प्रियंका जी, अब तो एक काव्य संग्रह तैयार हो गया आपकी कविताओं का, जिसे मैं अपनी फाइल में भी शामिल करूंगी 🙏🙏😊

श्रीमती प्रियंका गोस्वामी

आपके स्नेह से हुई ,,,,,लेखनी मेरी गुलज़ार है,,,,,,
आभार है जी प्रज्ञा जी ,,,,,,,,बहुत -बहुत आभार है,,,,,,,,,🌺🌺🌺

shraddha kedia

prenadai

श्रीमती प्रियंका गोस्वामी
,प्रिय प्रज्ञा जी,,,,आत्मीय नमन,,,, 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 ,,शुक्रिया प्रज्ञा ,,,,,,【कविता】 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 मुस्कुराता हुआ इक भँवरा,,,,,,,,,,,,, प्रज्ञा जी की कक्षा में दाख़िल हुआ,,,,,,,,, प्रज्ञा जी ने कहा—–सुनो भंवरे,,,! क्या तुम गणित पढोगे,,,,,,,,,,? भँवरा गणित से अनजान था,,,,,,,,,,,, फूलों पर मंडराना ही उसका काम था,,,,,,,,,, प्रज्ञा जी ने जादू की छड़ी जो घुमाई,,,,,,,, भंवरे को भी गिनती आई,,,,,,,,,,,,,,,, इक चंचल सी प्यारी तितली,,,,,,,,,,, प्रज्ञा जी के स्कूल पहुँची,,,,,,,,,,,,, कक्षा की खिड़की खुली हुई थी,,,,,,,, प्रज्ञा जी गणित में मगन हुई थीं,,,,,,,,, तितली बोली–मैडम जी नमस्ते,,,,,, प्रज्ञा जी मुस्कराईं बोलीं हँसते -हँसते,,,,,,,,,, ओह्ह तितली रानी आओ सिखाऊँ घटाव,,,,,,, करो गणित से भी झुकाव,,,,,,,,,,,, तितली ने… Read more »
Mrs Pragya Singh

प्रिय प्रियंका जी आपकी कविताएं क्या ग़ज़ब होती है 👌आप तो स्वयं मुझे प्रेरित करती हैं, आपसे मिलने की हार्दिक इच्छा है 🙏मेरा Mo no 9424100833 पर अवश्य ही संपर्क कर मेरी ये इच्छा पूरी करें 😊

Subhash Kumar Gupta

very nice

kumari Preeti Shrivas

good

daleep singh

शानदार

kedar Nath Deshmukh

बढ़िया

rameshwarprasadbhagat

बहुत अच्छा

Govind Patel

very good

Mrs Pragya Singh

Thank you

kedar Nath Deshmukh

बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी

श्रीमती प्रियंका गोस्वामी

प्रिय प्रज्ञा जी,,,,,हार्दिक बधाइयाँ,,,,
💎💎💎💎💎💎💎💎💎💎

“”आप वही प्रज्ञा हैं “”【 कविता 】
➖➖➖➖➖➖➖➖➖✍️

जो हीरे की चमक को दे चुनौती ,,,
गणितीय ज्ञान की मोती पिरोतीं,,,,,

जो नवाचार कर चमक भरी उजास लातीं,,,
माणिक्य से गणितीय गमले बनातीं,,,,,,,,

जो ज्ञान की गंगा धरा पे बहातीं,,,,,,,
लक्ष्य की लालिमा से सुबह ले आतीं,,,,,,,

सेवा यज्ञ की कुंड पे समर्पित हो जातीं,,,,,,,,
विद्यार्थियों का उम्दा भविष्य बनातीं,,,,,,,,,

क्या कहूँ क्या लिखूं आप तो समर्पण की संज्ञा हैं,,,,,
हाँ,,,सरस्वती सा शुभ नाम आप वही प्रज्ञा हैं,,,,,,,,,✍️✍️✍️

Mrs Pragya Singh

क्या लिखती हैं आप प्रियंका जी 👌👌🙏🙏बहुत बहुत धन्यवाद 🙏🙏

विष्णुचरण पटेल

बहुत ही सुंदर

Mrs Pragya Singh

बहुत बहुत धन्यवाद सर जी

sandhya kumari

good effort mam

Mrs Pragya Singh

बहुत बहुत धन्यवाद मैडम जी

ramesh nirmalkar

good

Anu Puri

good

Mrs Pragya Singh

Thank you

Mrs Pragya Singh

आपका हार्दिक स्वागत है मैडम जी आप अवश्य आइए मेरा लैब देखने 🙏

श्रीमती प्रियंका गोस्वामी

जरूर,,,स्वीकार करती हूँ आपका निमंत्रण,,,
बहुमूल्य है मेरे लिए आपका आमंत्रण,,,

जल्दी ही आऊंगी सीखने के लिए,,,,,
ऊर्जा भी तो लेनी है आपसे लेखनी के लिए,,,,

बहुत बहुत आभार,,,,,,💐💐💐

kedar Nath Deshmukh

बहुत सुन्दर.. अनुकरणीय

Mrs Pragya Singh

Thank you

श्रीमती प्रियंका गोस्वामी

प्रिय प्रज्ञा जी,,,,,आपकी प्रखर प्रतिभा को प्रणाम,,,,,
बेहतरीन है जी आपका शुभ नाम,,,,,,
साक्षात वीणापाणि का एक रूप हैं आप,,,,,,
बुद्धि दात्री का एक स्वरूप हैं आप,,,,,,,,,

गणितीय लैब का सुंदर प्रयोग,,,,,,
TLM का करतीं हैं भरपूर उपयोग,,,,,
सर्जरी पश्चात भी रखा कार्य जारी,,,,,
मैं हूँ हृदय से आपकी आभारी,,,,,,,,

अंदर आपके अथाह संवेदनशीलता,,,,,
मेरे न होने पर कैसे पढ़ेंगे बच्चे,,,,,,,
कितनी पावन नैतिक बोधशीलता,,,,,,

शुरू किया एक पुस्तकालय,,,,,,,,
विद्यालय होता विद्या का आलय,,,,,,
आइये साथियों ,,चलें प्रज्ञा जी की कक्षा की ओर,,,,,,
तभी तो होगी मनोहारी, मधुरिम ,मनमोहक भोर,,,,,,✍️✍️✍️

Mrs Pragya Singh

बहुत बहुत आभार मैडम जी 🙏मेरी भावनाओं को आपने शब्दों में पिरो दिया 🙏बहुत बहुत धन्यवाद जी

Mrs Pragya Singh
dhruw kumar mahant

एक उत्साही शिक्षक ,,,,अपने बच्चों में उत्साह भरकर कठिन से कठिन विषय को भी सरल,,सहज,,और सुगम बना सकते हैं। मैडम प्रज्ञा इस बात के जीवन्त उदाहरण हैं। हर एक शिक्षक को विषयगत और पाठ्यक्रम के अनुरूप एक सकारात्मक सोच और नजरिये रखना चाहिये। स्थानीय परिवेश,,, स्थानीय संसाधन ,,औए सबसे बड़ी बात बच्चों की अभिरूचि के अनुरूप पठन पाठन हो तो ,,,प्रत्येक बच्चे दक्ष होंगें।मैडम की प्रयास सराहनीय है। मैं भी गणित का शिक्षक हु ,,,आरोही,,अवरोही ,,छोटी संख्या,,बड़ी संख्या पर बच्चों को नवाचार किया है जिसका व्यापक लाभ उन्हें मिल है।

Mrs Pragya Singh

बहुत बहुत धन्यवाद सर जी

mahettar lal Dewangan

बहुत सुंदर

wpDiscuz
119 Comments
35