राजेन्द्र ठाकुर का डिजिटल विद्यालय

राजनंदगांव, छत्तीसगढ़|

ये कहानी है राजेंद्र ठाकुर जी और उनके डिजिटल विद्यालय की| राजेंद्र जी ने अपने स्कूल में एक app के माध्यम से पूरे विद्यालय को एक डिजिटल विद्यालय बना डाला| आइये जानते है राजेंद्र जी की कहानी उन्हीं की ज़ुबानी|


“नमस्कार दोस्तों| मेरा नाम राजेंद्र ठाकुर है और आज मैं आपको अपने और अपने विद्यालय के बारे में कुछ बताना चाहता हूँ| मैं अपने विद्यालय का प्रधान अध्यापक हूँ| मेरी हमेशा यही कोशिश रहती है कि किस प्रकार बच्चों में तकनीकी विकास के बारे में जागरूकता बढ़ाई जाए और किस प्रकार उनमें तकनीकी अविष्कार करने की योग्यता बढ़ाई जाए| हम ने ‘पिपरिया स्कूल’ के नाम से एक मोबाइल एप्प तैयार किया है जिससे स्कूल की गतिविधियों के बारे में सब तक जानकारी पहुँचाई जाती है और दस्तावेज़ों को सुरक्षित रखा जाता है| इस पोर्टल के माध्यम से शिक्षक सिर्फ एक क्लिक से विद्यालय में होने वाले कार्यक्रमों के बारे में पूरी जानकारी ले सकते हैं।

विद्यालय को डिजिटल बनाकर बच्चों को डिजिटल शिक्षा देने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान केंद्र (रायपुर) ने मार्च के महीने के चर्चा पत्र में विद्यालय और मेरे नेतृत्व को स्थान दिया है| आज सोचता हूँ तो यह मानता हूँ कि मेरी पहल और इन सभी शिक्षकों के सहयोग ने एक साधारण विद्यालय को डिजिटल विद्यालय बनने में कामयाब किया|

यह कहानी श्री राजेंद्र ठाकुर के जीवन पर आधारित है जो, महासमुंद, छत्तीसगढ़ से हैं|
कहानी तहरीन रेयाज़ के द्वारा लिखी गयी है|  
हम छत्तीसगढ़ सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने हमें  Humans of Indian Schools से परिचित किया|

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Nisha devi

nice

Santosh Kumar

very good Sir

Manoj kashyap GOVT. PRIMARY SCHOOL KOSMA

nice

श्री मोजय शंकर पटेल

nice

Aruna diwan

nice

Vijay Laxmi Rao

good

Aaditya sharma

nice

Santosh kumar

Good

Arjun varma

Behtarin kary

madanlal

bhoot srahniy kaam h

श्रीमती नलिनी राय

बहुत ही सराहनीय कार्य सर

raghuvansh mishra

nice Sir.

Ramdular Nirala

digital school very nice

Lekh Ram Himral

The admirable work of digitalizing the school.

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14 Comments