एक विद्यालय अनेक काम

बलोदा बाज़ार, छत्तीसगढ़|

“विद्यालय का प्रबंधक बनना मतलब एक बहुमूल्य चुनौती को स्वीकारना| मैं हर क्षेत्र के हर बच्चे के समग्र विकास के लिए मेहनत करता हूँ और मैं खुश नसीब हूँ कि पूरा समुदाय मेरा साथ देता है और मुझे प्रोत्साहित करता है|

हम उन्मुखीकरण कार्यक्रम (orientation program) के मध्यम से माताओं को समझाते हैं कि किस प्रकार घर में बच्चों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करने से उनकी कक्षा में प्रदर्शन बेहतर होता है| आखिर बच्चे सबसे अधिक अपनी माँ से ही तो सीखते हैं| विद्यालय में हम बच्चों को विभिन्न खेलों में भाग लेने के लिए उत्साहित करते हैं, उन्हें व्यायाम, योग इत्यादि से भी परिचित करवाते हैं| वे सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत, नृत्य व नाटक में भाग लेते हैं|

अपनी रुचियों और प्रतिभाओं के आधार पर एक बच्चा दूसरे से बिलकुल अलग होता है| और इसलिए  हम यह मानते हैं कि बच्चों को विभिन्न गतिविधियों तथा कलाओं से परिचित करके हम उन्हें अपनी राह चुनने के लिए स्वतंत्रता देते हैं|

बच्चों को कोर्स के अलावा विभिन्न पुस्तकों व कहानियों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मैंने विद्यालय में एक पुस्तकालय का निर्माण किया, जिसे मैंने मुस्कान पुस्तकालय नाम दिया|

इस पुस्तकालय के लिये हमारे शासन सचिव की ओर से पाठ्य पुस्तक  निगम के द्वारा 180 पुस्तकें उपलब्ध कराई गई थी| इनमें स्थानीय कहानियाँ भी शामिल की गयीं। मुस्कान पुस्तकालय के तहत मैंने बच्चों की सहायता से एक बाल कैबिनेट की शुरुआत की जिसके सदस्यों ने पुस्तक वितरण की ज़िम्मेदारी ली। मैं गर्व से यह कह सकता हूँ कि मेरे विद्यालय के छात्रों में नेतृत्व कौशल कूट-कूट कर भरा है|

पर केवल किताब ही नहीं, बच्चे अनुभवों से भी सीखते हैं| और नए अनुभवों से बच्चों को परिचित करने के लिए मैंने उन्हें कैंप में ले जाना शुरू किया| कैंप में, मैं उन्हें वृक्षारोपण करने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ| यह कार्य मैंने उच्च वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 8 साल तक किया| इससे बच्चों ने विद्यालय में भी पेड़ लगाए| जब मैं आज इन लम्बे पेड़ों को देखता हूँ, तो बहुत खुश होता हूँ| विद्यालय केवल चार दीवारों के बीच उपलब्ध स्थान नहीं होता| विद्यालय बनता है बच्चों की भावनाओं, उनके आविष्कारों और उनके सपनों से|

यह कहानी श्री राम दुलार निराला के जीवन पर आधारित है जो, बलोदा बाज़ार, छत्तीसगढ़ से हैं|
कहानी तहरीन रेयाज़ के द्वारा लिखी गयी है|  
हम छत्तीसगढ़ सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने हमें  Humans of Indian Schools से परिचित किया|

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Aruna diwan

effective

Aruna diwan

i also do this activity

श्री मोजय शंकर पटेल

बहुत सुंदर प्रयास

Aaditya sharma

nice

Arjun varma

bahot achha prayas

Jhaneshwar Kumar Dewangan

NIRALA SIR KA PRAYAS SARAHNIYA HAI

Ramdular Nirala

धन्यवाद

Parmeshwar

आप की कहानी प्रेरणादायक है ।
आपकी इस कहानी को पढ़कर हमारे अंदर एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

Ramdular Nirala

thanks sir ji

raghuvansh mishra

good

Ramdular Nirala

धन्यवाद सर जी

PAWAN KUMAR SHRIVAS

श्री निराला सर जी की कहानी प्रेरणादायक है

Ramdular Nirala

धन्यवाद सर जी

rukhmani nishad

thanks sir

resham

very nice work

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15 Comments