जन्मदिन मुबारक हो सर!

कोरिया, छत्तीसगढ़|

आज स्कूल में तैयारियाँ बड़े ही ज़ोर-शोर से चल रही हैं! आज सबके पसंदीदा शशि भूषण पांडेय जी का जन्मदिन जो है!

वे इस स्कूल से करीब 6 साल पहले जुड़े थे और आते ही सबके चहीते बन गए थे। उन्होंने ही स्कूल में बच्चों के जन्मदिन मानाने की परंपरा शुरु की थी। उनका मानना है कि अगर हम अपने घरो में अपने बच्चों का जन्मदिन इतनी धूम-धाम से मनाते हैं तो स्कूल के बच्चों का जन्मदिन भी उतने ही उत्साह से मनाया जाना चाहिए। सबसे पहले उन्होंने अपनी क्लास में सब बच्चों के जन्मदिन मनाना शुरू किया। फिर धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे स्कूल में प्रसिद्ध हो गई। इस परंपरा के चलते अब बच्चे बिकुल छुट्टी नहीं करना चाहते।

अगर अब आप स्कूल में देखें तो हर एक बच्चे का जन्मदिन एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है। पूरा स्कूल उस बच्चे के लिए गाना गाता है। उसे स्कूल की तरफ से एक जन्मदिन कार्ड और एक तोहफ़ा दिया जाता है। बस यही नहीं, जन्मदिन की ख़ुशी में पूरे स्कूल में टॉफ़ी या चॉकलेट भी बांटे जाते हैं। ये सब का खर्च शशि भूषण जी खुद अपने दूसरे स्टाफ के कर्मचारियों के सहयोग से उठाते हैं।

अब वे बच्चों के प्रति इतना प्रेम भाव रखेंगे तो बच्चे कहाँ पीछे हटने वालो हैं। आज उनके जन्मदिन पर सभी धमाल करेंगे। रंगोली लगभग तैयार है, सजावट पूरी है, गुलदस्ता भी आ गया। अब इंतज़ार हैं तो बस शशि भूषण सर और उनकी कीमती मुस्कुराहट का!

यह कहानी श्री शशि भूषण पाण्डेय के जीवन पर आधारित है जो, कोरिया, छत्तीसगढ़ से हैं|
कहानी हर्षिता सैनी के द्वारा लिखी गयी है|  
हम छत्तीसगढ़ सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने हमें  Humans of Indian Schools से परिचित किया|

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Poonam Pandey

great work

raghuvansh mishra

begining of good tradition.

sheela sahu

Good sir ji

shashi bhooshan pandey

thanks

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4 Comments