उम्मीद ज़रूरी है, सफलता नहीं

रायपुर, छतीसगढ़|

“एक शिक्षक होने की सबसे अच्छी बात है की यह कभी आपको चुनौती देना नहीं छोड़ती। हर साल नए बच्चे आते हैं और हार साल हमारे लिए नई चुनौतियां लाते हैं। पिछले साल की ही बात है जब मेरी क्लास में एक गंगा नाम की लड़की आई। वो बहुत गुमसुम रहा करती थी। मुझे लगा शायद नई कक्षा के माहौल से थोड़ा घबराई हुई है। मैंने काफी समय तक उसे देखा मगर वो फिर भी कुछ नहीं बोली। मैंने फिर उसके पुराने टीचर्स से बाद की तो पता लगा की वो शुरुवात से ही बिलकुल चुप रही है। वह कक्षा में न तो अपनी हाज़री बोलती थी और न ही अपने सहपाठियों से बातें करती थी। शिक्षकों को लगा की उसे कुछ मानसिक परेशानी है। मगर जब स्वास्थ्य के जाँच के लिए विद्यालय में डॉक्टर आये तो उन्होंने बताया कि बच्ची बिलकुल ठीक है, उसे किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। बच्ची के माता-पिता ने भी बताया की वह घर पर बहुत बातें करती है।

मैंने फिर कक्षा में उसपर ज़्यादा ध्यान देना शुरू किया। मैं उसे बोलने के और ज़्यादा मौके देने लगी मगर मेरी सभी कोशिशें व्यर्थ रही। फिर मैंने उसे लिखने का काम ज़्यादा देना शुरू किया और कोशिश की कि उसके ज़रिये उससे बुलवाया जाये। जितने में उसमे कुछ बदलाव नज़र आता हमारा साल ख़तम हो गया और वो 6 में चली गई| काश मुझे कुछ और समय मिल पाता और मैं उसकी हिचक कम कर पाती। मगर हम शायद बच्चों को आगे बढ़ने में बस मदद ही कर सकते है, ऐसा ज़रूरी नहीं है की हर बार हम सफल ही रहे। पर मेरी कोशिश यह रहती है की उसे और उसके ही तरह एनी बच्चों की मैं सहायता कर पाऊँ और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर पाऊँ|”

यह कहानी श्रीमती सुनीता गैक्वाद के जीवन पर आधारित है जो, रायपुर, छत्तीसगढ़ से हैं|
कहानी लावन्या कपूर के द्वारा लिखी गयी है|  
हम छत्तीसगढ़ सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने हमें  Humans of Indian Schools से परिचित किया|

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sunita gayakwad

Thank you Lavanya ji .
today she (Ganga)is in class 7th and able to study well

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1 Comments