कबाड़ से जुगाड़

पंडरिया , छत्तीसगढ़|

श्री तुलस चंद्रकार विज्ञान विषय को मनुष्य के लिए वरदान मानते है| विद्यार्थियों को विज्ञान की संकल्पनाओं को संतोषजनक ढंग से समझाने हेतु वह लगातार नए कार्यदक्षित प्रयोगों को बढ़ावा देते है| चंद्रकार जी प्रयोग सामग्री प्रयोग किये गए वस्तुओं से ही जुटाते है जैसे उपयोग में आई हुई प्लास्टिक बोतल को श्वसन तंत्र (respiratory system), डस्ट क्लीनर मॉडल, वायु में कार्बन डाइऑक्साइड उपस्थित परीक्षण मॉडल, प्रयोग किये गए डब्बे से चालित प्रोजेक्टर बनाना; नलिका से चालित श्वसन तंत्र, पाचन तंत्र बनाना| उनके इन प्रयासों से विद्यार्थियों को प्रयुक्त वस्तुओं का पुन: प्रयोग करने का ऐसा शौक लगा कि अब वे अपने घरों में भी व्यर्थ सामान, जैसे पुरानी बोतलों का पेन स्टैंड या ब्रश स्टैंड बनाना उचित समझते हैं|

विद्यालय में पेन , पेंसिल जैसी वस्तुओं के खोने की बढ़ती शिकायतों का निजात करने हेतु तुलस जी ने “इमानदारी की पाठशाला” का ईजाद किया| यहाँ विद्यार्थियों की उपयोगी सामग्री उनके निर्धारित मूल्य टैग लगाकर रखी गयी है I यदि किसी छात्र को ज़रूरत हो तो वह उस जगह से सामान लेकर उसका मूल्य पास रखी पेटी में डालते हैं | अगर किसी समय छात्र के पास उचित मूल्य न हो तो वह बाद में भी पैसे पेटी में डाल सकता है|
चंद्रकार जी ने “बचत बैंक खाता” का भी आविष्कार किया है| छात्र अपने रोज़ के खर्चे में से कुछ पैसे बचाते हैं और उन्हें अपने नाम पर खुले खाते में जमा कर देते हैं| साल के आखिर में छात्रों की जमापूँजी उन्हें दे दी जाती है| तुलस जी का कहना है कि ऐसी प्रक्रियाओं से बच्चों का आत्मबल बढ़ता है और वे धन की कीमत समझते हैं|

यह कहानी श्री तुलस राम चंद्रकार के जीवन पर आधारित है जो, पंडरिया, छत्तीसगढ़ से हैं|
कहानी ईशा राखरा के द्वारा लिखी गयी है|  
हम छत्तीसगढ़ सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने हमें  Humans of Indian Schools से परिचित किया|

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harendra kumar

bhut hi achchha kary

Amar singh

good

Loknath. bhardia

very good.

ramavatar sahu

बहुत सुन्दर

Lekh Raj Thakur

very nice self discipline

Chandra Vati

very nice

omprakash sahare

बहुत ही अच्छा

Hemlata Sahu

super

मधुसूदन नेवेन्द्र

अच्छा लगा

Atul Kumar dhruw

very nice

GAYA RAM DHRUW

बहुत अच्छा सरजी

Mahima Nand Sharma

best work sir

AJAY KUMAR DEWANGAN

very good

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