घर से कक्षा का सफ़र

धर्सिवा, रायपुर|

शिक्षकों की अक्सर सबसे बड़ी समस्या होती है जब वह कक्षा में पढ़ा रहे होते हैं तो बच्चे ध्यान नहीं देते| पर उन शिक्षकों का क्या जिनके बच्चे कक्षा तक ही नहीं पहुँचते? जब बच्चे ही कक्षा में नहीं हैं तो पढ़ाएं किसे? और ये ही सबसे बड़ी समस्या है वर्षा जैन की कक्षा में| धारसिवा में पढ़ाने वाली वर्षा एक ऐसी जगह में पढ़ाती है जहाँ बच्चों को उनके माँ बाप स्कूल के बजाये काम पर भेजने पे ज़ोर डालते हैं।| और अगर बच्चे स्कूल आ भी जाते है, तो स्कूल के बाद काम करते हैं। फलस्वरूप, अगले दिन बच्चे इतने थके हुए होते हैं कि या तो वह स्कूल नहीं आते या फिर देर से अगर आ भी जाये तो उनका दिल पढ़ाई में नहीं लगता| तो इस चुनौती का सामना वर्षा ने कैसे क्या? जैसे ही गर्मियों की छुट्टी हुई तो वर्षा ने बच्चों के घर जाकर उनके माता पिता से बात की| उन्होंने अभिभावकों को यह समझाने की कोशिश की, कि अगर बच्चे पढेंगे नहीं तो उनका भविष्य भी ऐसा ही होगा जैसा उनका वर्तमान है| गर्मी की छुट्टियां होने के बावजूद, वर्षा अपने स्कूल के बच्चों को पढ़ा रही हैं| अभी सिर्फ 2-3 बच्चे ही आ रहे हैं पर उन्हें पूरी आशा है कि उनके बार-बार अभिभावकों से बात करने से उनकी सोच में फरक पड़ेगा|

‘अगर हमें अपने समाज में सुधार चाहिए, तो इन बच्चों को शिक्षित करना बहुत ज़रूरी है|’ यह सोच है वर्षा की अपने स्कूल के बच्चों के लिए| यह बच्चे ऐसे घरों से आते है जहाँ पैसों को लेकर बहुत तंगी है| कई बार वर्षा ने अपने पैसों से बच्चों के लिए कपड़े, कोपियाँ और किताबें खरीदी हैं| कई बार स्कूल में असामाजिक तत्वों ने तोड़-फोड़ भी की है| फिर इन सभी मुश्किलों के बावजूद वर्षा रोज़ स्कूल जाकर इन बच्चों को क्यों पढ़ाती है? ‘अगर ऐसे घरों के किसी एक बच्चे को भी में पढ़ा पाई, तो सोचिये वह अपने घर के और सदस्यों को पढ़ा पाएंगे और इसी से हम एक सभ्य समाज की ओर बढ़ पाएंगे|’

यह कहानी वर्षा जैन के जीवन पर आधारित है जो, रायगढ़, छत्तीसगढ़ से हैं|
कहानी कृति भंडारी के द्वारा लिखी गयी है|  
हम छत्तीसगढ़ सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने हमें  Humans of Indian Schools से परिचित किया|

 

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Gourav Kumar

very good

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1 Comments