प्रधान शिक्षक बनकर किया स्कूल का सुधार

लोरमी, छत्तीसगढ़|

2008 की बात है जब युगल किशोर सिंह जी हमारे स्कूल से जुड़े। उनका सबसे बड़ा मकसद था सरकारी स्कूलों में लोगों का खोया हुआ रुझान फिर से जागरूक करना। स्कूल में कुछ समय बीतने के बाद उन्हें बच्चों के स्कूल न आने के कारण समझ आने लगे। स्कूल के सूने कमरे और उबाऊ पढाई बच्चों को ज़रा भी दिलचस्प नहीं लगती थी। बिना किसी अभिप्रेरणा के कारण बच्चों ने स्कूल आना ही छोड़ा हुआ था। उन्हें कुछ महीनों बाद स्कूल का प्रधान शिक्षक बना दिया गया और बस वहीँ से उन्होंने स्कूल की हालत सुधरने का काम शुरू कर दिया।

सबसे पहले उन्होंने स्कूल की बाउंड्री वाल बनाई। उसके लिए बांस-बल्ली का प्रबंध उन्होंने अपने घर से किया। बिना बाउंड्री वाल के कारण गांव के लोगों ने वहां अपने ट्रक और ट्रैक्टर खड़े करना शुरू कर दिया था। जब उन्होंने वे हटवाने की कोशिश की तो उनको गांव वालो से बहुत खरी-खोटी भी सुनने को मिली। मगर वह पीछे नहीं हटे और सफलतापूर्वक बाउंड्री वाल स्थापित की और बच्चों की मदद से पेड़-पौधे भी लगाना शुरू किया।

धीरे-धीरे उन्होंने अपने स्टाफ के शिक्षकों को भी प्रेरित करना शुरू किया। उनका मानना है की शिक्षकों को वेतन के लिए नहीं बल्कि बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए पढ़ना चाहिए। कई बार तो प्रधान शिक्षक होने के कारण उन्हें शिक्षकों पर दबाव भी बनाना पड़ा। मगर धीरे-धीरे सारे शिक्षक उनसे प्रभावित हो गए और स्कूल के उन्नति में अपना योगदान देने लगे। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने स्कूल का नक्शा बदल कर रख दिया। आज हरा-भरा बगीचा, झूले, सजे कमरे, कंप्यूटर, टीवी सब ही है स्कूल में। अब हमारा स्कूल किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं है और अगर दर्जसँख्या की बात करे तो आप कभी हमारे स्कूल में आकर ही देख लीजियेगा।

यह कहानी श्री युगल किशोर सिंह राजपूत के जीवन पर आधारित है जो, रायगढ़, छत्तीसगढ़ से हैं|
कहानी हर्षिता सैनी के द्वारा लिखी गयी है|  
हम छत्तीसगढ़ सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने हमें  Humans of Indian Schools से परिचित किया|

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khirod sahu

good work

samiksha tripathi

बहुत ही अनुकरणीय एवं सराहनीय कार्य,,,आपके द्वारा बच्चों के अधिगम क्षमता की वृद्धि के लिए किये गये नित नये नवाचार एवं शाला परिसर की सजावट,पौध रोपण का कार्य बहुत ही सराहनीय है।नमन है आप जैसे शिक्षक को

raghuvansh mishra

Amazing work.

राजकुमार कश्यप

अद्भुत व्यक्तित्व के धनी हैं युगल जी,वास्तव में उनके स्कूल में जाकर हम जैसे शिक्षक बहुत कुछ सीखते हैं, कुछ नया करने की चाहत रखने वाले शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत है यह स्कूल और यहाँ का वातावरण, सराहनीय और अनुकरणीय प्रयास के लिए युगल जी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले, भगवान से यही प्रार्थना है

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